मूवी रिव्यू: जानें कैसी है हॉलिवुड सुपरहीरो फिल्म 'इटर्नल्स'

मार्वल सिनमैटिक यूनिर्वस के दस सुपरहीरोज की दमदार फौज हो, जिनको पर्दे पर उतारने का जिम्मा ऑस्कर विजेता निर्देशक क्लोई जाओ पर हो। साथ में एंजेलिना जोली (Anjelina Jolie, रिचर्ड मैडन (), सलमा हायक (Salma Hayek), किट हैरिंगटन (Kit Harington) जैसे नामी सितारों की लंबी-चौड़ी कतार हो, तो उस फिल्म के लिए दर्शकों की उम्मीदें भी कई गुना बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि हॉलिवुड फिल्म 'इटर्नल्स' (Eternals) के लिए भी दर्शकों में काफी उत्साह है। एमसीयू की पुरानी फिल्मों के सांसें रोक देने वाले ऐक्शन और रोमांच से अलग इस फिल्म में इंसानियत, भावनाओं, ठहराव, विविधता पर ज्यादा जोर दिया गया है, जिससे 'अवेंजर्स' के जादू के मुरीद रहे एमसीयू फैंस थोड़े निराश हो सकते हैं। कहानी कहानी दस अमर सुपरहीरोज इटर्नल्स की है, जिन्हें ब्रह्मांड से इंसान को बचाने के लिए भेजा गया है। ये सभी बेहद शक्तिशाली एरिशेम के निर्देशों का पालन करते हैं। ये इटर्नल्स 7000 सालों से धरती पर गुमनाम जिंदगी जीते हुए दानव रूपी डेविएंटस से उसकी रक्षा कर रहे हैं। इन इटर्नल्स की मुखिया हैं एजैक (सलमा हायक), जो एरिशेम के निर्देशों के हिसाब से बाकी इटर्नल्स को संचालित करती हैं। वहीं, टीम में सबसे पावरफुल है, इकरीस (रिचर्ड मैडन)। उनके अलावा ताकतवर गिल्गमेश (डॉन ली), इमोशनल सरसी (जेमा चैन), शक्तिशाली फास्टोस (ब्रायन टायरी हेनरी), हसोड़ किंगो (Kumail Ali Nanjiani), तेज रफ्तार मक्कारी (लॉरेन रिडलॉफ-Lauren Ridloff), ताकतवर थीना (एंजेलीना जोली), दूसरों का दिमाग वश में कर लेने वाला ड्रयूग (बैरी कियोगन-Barry Keoghan) और रूप बदल लेने वाली स्प्राइट (लिया मैकह्यू) है। डेविएंट्स के खात्मे के बाद एजैक के कहे अनुसार, ये सभी इटर्नल्स अलग-अलग जगहों पर आम इंसान की तरह जिंदगी बिता रहे हैं। इनमें भारतीय दर्शकों के लिए सबसे रोचक है, बॉलिवुड स्टार बने किंगो और उनके मैनेजर करुण यानी हरीश पटेल की जुगलबंदी। इस जोड़ी की कॉमिडी हंसाती है, पर साथ ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को महज मसखरा समझने के अमेरिकन दृष्टिकोण को भी फिर उजागर कर देती है। खैर, एक बड़े खतरे का आभास होने पर ये सारे फिर इकट्ठा होते हैं, लेकिन तभी उन्हें पता चलता है कि उनके असली दुश्मन दरअसल डेविएंट्स हैं ही नहीं। उन्हें अपने अस्तित्व से जुड़ा एक गहरा राज पता चलता है, जिससे उनमें आपस में ही दो फाड़ हो जाता है। ये सब क्यों होता है? आगे क्या होता है? ये सब फिल्म देखकर पता चलेगा। समीक्षा 'अवेंजर्स' के बाद 'इटर्नल्स' निश्चित तौर पर एमसीयू की एक और बड़ी महत्वाकांक्षी कोशिश है। इस बार उन्होंने पहली बार मूक-बधिर से लेकर समलैंगिक सुपरहीरो तक विविधतापूर्ण टीम खड़ी की है, ऐक्शन के बजाय इमोशंस को वरीयता दी है। प्रॉडक्शन डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स, म्यूजिक उम्दा हैं, लेकिन 7000 साल तक का सफर करने वाली ये फिल्म मेसोपोटामिया से लेकर बेबीलोन तक, मुंबई से लेकर लंदन तक, ईसा पूर्व से लेकर गुप्त काल तक इतनी जगह ट्रैवल करती है कि इस पहेली को याद रख पाना मुश्किल होता है। फिल्म में इतने सारे किरदारों और उन सभी की कहानियों के बीच भी दर्शक उलझकर रह जाते हैं। ऐक्शन सीक्वेंस कई जगह कमजोर लगते हैं। एंजेलीना जोली, किट हैरिंगटन जैसे ऐक्टर्स को पर्याप्त मौका न मिलना भी निराश करता है। हालांकि, आखिर में होने वाले खुलासे से अगले सीक्वल का इंतजार बना रहता है।


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