क्रूज ड्रग्स केस (Cruise Drugs Case) में एक ओर जहां (Aryan Khan) आर्थर रोड जेल में बंद हैं, वहीं बॉलिवुड से लेकर कानून के जानकार भी अब उनके समर्थन में बोलते हुए नजर आ रहे हैं। बीते दिनों पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने आर्यन का सपोर्ट करते हुए NCB की तुलना 'शुतुरमुर्ग' से की थी, वहीं अब सीनियर क्रिमिनल लॉयर () ने भी आर्यन का सपोर्ट किया है। माजिद उम्मीद जताते हैं कि आर्यन को सेशंस अदालत से जमानत मिल जाएगी। वह कहते हैं कि यदि 17 दिनों की कैद के बाद भी अब आर्यन को जमानत नहीं मिलती है तो यह बेवजह की सजा होगी। माजिद मेमन ने यह भी बताया कि क्या वॉट्सऐप चैट्स () के कारण आर्यन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 'उनके खिलाफ सिर्फ 2 आरोप नजर आते हैं'हमारे सहयोगी 'ईटाइम्स' से बातचीत में माजिद मेमन ने कहा, 'उन्हें जमानत मिल जानी चाहिए। मेरी नजर में आर्यन के खिलाफ ड्रग्स का सेवन करने और उस दिन पार्टी में शामिल होने के अलावा और कोई ग्राउंड नहीं है। 17 दिनों की कैद के बाद भी यदि जमानत नहीं मिलती है तो मेरी नजर में यह किसी भी अभियुक्त के लिए बेवजह की परेशानी और सजा होगी।' क्या वॉट्सऐप चैट से बिगड़ेगी बात?आर्यन खान केस में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) लगातार जमानत का विरोध कर रहा है। कोर्ट में आर्यन के खिलाफ अभी तक NCB की सभी दलीलें मुख्य रूप से वॉट्सऐप चैट पर आधारित हैं। आर्यन के ये चैट अरबाज मर्चेंट और एक कथित ड्रग पेडलर के साथ हैं। जब माजिद मेमन से पूछा गया कि कोर्ट में सबूत के तौर पर वॉट्सऐप चैट्स कितने प्रभावशाली हैं तो उन्होंने कहा, 'नहीं! कथित तौर पर चैट की बातचीत से स्थिति नहीं बिगड़ती है, क्योंकि इसका कोई पुष्ट या सब्सटैंटिव सपोर्ट नहीं है। अभियोजन पक्ष का यह आशंका जताना कि वह एक प्रभावशाली परिवार से हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं, भी बिना मेरिट के है।' अरबाज के वकील ने कही थी ये बातबीते दिनों अरबाज मर्चेंट के वकील तारक सईद ने भी यही बात कही थी। सईद ने कहा था कि एनसीबी के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। वह जो भी कह रहे हैं सबकुछ वॉट्सऐप चैट्स पर आधारित है। पंचनामा पर एनसीबी ने आर्यन या अरबाज के फोन सीज करने का भी जिक्र नहीं किया है। 'ड्रग्स की मात्रा बेहद कम है, यह जमानती है'माजिद मेमन ने अपनी बातचीत में यह भी कहा कि ड्रग्स की जिस 6 ग्राम मात्रा का जिक्र हो रहा है, वह बेहद कम मात्रा है और यह पर्सनल यूज के लिए ही हो सकता है, यह कर्मशियल क्वांटिटी में नहीं है। इसलिए यह भी एक जमानती अपराध है।
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